Dwarkadhish KrishnaTemple Gujarat,
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Dwarkadhish Temple Dwarka Gujarat Timing, Darshan, History & Images


Dwarka Temple is situated near the Gomti River in Dwarka, Gujarat state of India, this temple is a famous pilgrimage site for Hindus. Dwarkadhish Temple, also known as Jagat Mandir, is known among the people. Dwarkadhish Temple is a Hindu Mandir dedicated to Lord Krishna. In this temple you get to see Chalukya style architecture,


The main temple is of five storeys which is very grand and amazing to see. According to archaeological findings, this famous Hindu temple is about 2,100 years old. The Dwarkadheesh Temple are part of the Char Dham pilgrimage considered sacred by Hindus in India, the temple is considered one of the Char Dham holy pilgrimage sites among Hindus after Rameswaram, Badrinath and Puri.


Shri Dwarkadhish temples are very revered and revered among Hindus. This temple attracts tourists. It is a tourist place in Gujarat where many visitors from the country and abroad come to see this unique temple, according to the Puranas, the main temple was built by Krishna's grandson Vajranabh.


Dwaraka temples was destroyed by a man named Mahmud Begada around 1472, and later rebuilt it between the 15th-16th century. According to historians, this famous Hindu temple was rebuilt by Raja Jagat Singh Rathore.


The temple is positioned at an elevation of about 13 meters above sea level. The temple of Subhadra, Balarama and Revathi, Vasudev, Rukmini are also available inside the temple for devotees to visit. The devotees enter this temple after taking bath in the Gomti River through the Swarga Dwar. On the day of Krishna Janmashtami, the crowd of devotees in this temple is at its peak, on this day Hindu devotees come to visit this temple.


Best time to visit Dwarkadhish Temple


This Hindu temple is the most visited tourist destination by tourists throughout the year. It is very pleasant to visit this temple between October to December. The main festival of this temple is Krishna Janmashtami which is celebrated in the month of September. You can also visit this temple at this time.


How to reach Dwarkadhish Temple



It is easier to reach Dwarkadhish Temple than any city. Dwarkadhish Temple is located only 1.5 km from Dwarka. The temple can be easily reached by local bus, auto and taxi.


What is the opening time of Dwarka Hindu Temple?


Dwarkadhish Krishna Temple of Gujarat is open to devotees from 6:00 am to 1:00 pm and 5:00 pm - 9:30 pm.


How long does it take to visit the Dwarkadhish Krishna Temple?


A crowd of devotees can be seen all the time in Dwarka temple, it takes at least 1 hour to visit the temple.

How much is the entrance fee of Dwarkadhish Hindu Temple


No entry fee

Here are some of the top tourist attractions to see in Dwarka


Nageshwar Jyotirlinga Temple
Bev Dwarka Island
Dwarka Beach
Rukmani Temple.
Gomti River / Ghat
Sudama Bridge / Bridge
ISKCON Temple
Swami Narayan Temple
Geeta Temple
Gopi Talao
Bhadkeshwar Mahadev Temple,


Interesting facts about Dwarkadhish Temple


Explaining the facts about the Dwarkadhish Temple located on the banks of the Arabian Sea and the Gomti River, in the extreme western coast of our country.

Dwarkadhish Temple is also known as Jagat Temple,

It is one of the four holy places of worship. (Dwarkadhish Temple in the west, Puri in the east, Rameswaram in the south, Badrinath in the north)

Dwarkadhish Temple, the original temple was built by Vajranabh, grandson of Shri Krishna.

The Dwarkadhish temple in Gujarat was destroyed by the 'Sultan' Mahmud Begada in the fifteenth century.

The temples are completely dedicated to Shri Vishnu.

The flag of 52 yards of cloth waving at the summit of the temple is one of the major attractions.

Why did Krishna go to Dwarka?

According to mythology, Lord Krishna killed his maternal uncle Kansa in the war and Lord Krishna moved to Dwarka after making his grandfather Ugrasena of Mathura as king.


Which month is best to visit Dwarka?

The most ideal month to visit Dwarka is from November to the last of February, if you want to participate in the celebration of Janmashtami Festival celebrated especially in Dwarka, then it is advisable to visit Dwarka during August and September.


Who built the Dwarkadhish temple?

The Dwarkadhish Temple, also known as Jagat Temple, located on the eastern bank of the Gomti River, was built by Vajranabha, the grandson of Lord Krishna.


How many days are enough for Dwarka?

One day is enough for Dwarka, you take around 5-6 hours to visit nearby places.


Where is Krishna's Dwarka located?

Krishna's Dwarka is located in the Indian state of Gujarat.


Which temple is dedicated to Lord Krishna in Gujarat?

Dwarkadhish Temple also known as Jagat Mandir which is a Hindu temple dedicated to Lord Krishna.



यह लेख द्वारकाधीश मंदिर गुजरात भारत के बारे में है।


भारत देश के गुजरात राज्य के द्वारका में  गोमती नदी के पास द्वारकाधीश मंदिर स्थित है, यह मंदिर हिन्दुओ के लिए एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। द्वारकाधीश मंदिर, जगत मंदिर के नाम से भी लोगो के बीच में जाना जाता है।  द्वारकाधीश मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस  मंदिर में आपको चालुक्य शैली की वास्तुकला देखने को मिलता है,


मुख्य मंदिर पांच मंजिला की हैं जो देखने में बहुत ही भव्य और अद्भुत है। पुरातात्विक निष्कर्ष के अनुसार यह प्रशिद्ध हिन्दू मंदिर लगभग 2,100 साल पुराना है। द्वारकाधीश मंदिर भारत में हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले चार धाम तीर्थ का हिस्सा हैं, मंदिर को रामेश्वरम, बद्रीनाथ और पुरी के बाद हिंदुओं के बीच चार धाम पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।  


यह मंदिर हिन्दुओ के मध्य बहुत आस्था और पूजनीय हैं। यह मंदिर टूरिस्टो को अपने तरफ आकर्षित करता हैं। गुजरात में यह एक टूरिस्ट प्लेस हैं जंहा हर साल देश और विदेशो से बहुत से प्रयर्टक इस अनोखे मंदिर को देखने के लिए आते हैं पुराणों के अनुसार, मुख्य मंदिर का निर्माण कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने किया था। 


इस मंदिर को १४७२ के आस पास महमूद बेगड़ा नाम का ब्यक्ति ने नष्ट कर दिया था, और बाद में इस मंदिर का 15 वीं -16 वीं शताब्दी के बीच इसका पुनर्निर्माण किया। इतिहासकारो के अनुसार इस प्रशिद्ध हिन्दू मंदिर को  राजा जगत सिंह राठौड़ द्वारा पुनर्निर्माण करवाया गया था। 


मंदिर समुद्र तल से लगभग 13 मीटर की ऊंचाई पर स्थिति है। मंदिर के अंदर सुभद्रा, बलराम और रेवती, वासुदेव, रुक्मिणी का मंदिर भी भक्तो को दर्शन करने के लिए उपलब्ध हैं गोमती नदी में स्नान करने के बाद स्वर्ग द्वार के माध्यम से श्रद्धालु इस मंदिर में प्रवेश करते हैं। कृष्णा जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर में भक्तो की भीड़ अपने चरम पर होती हैं , इस दिन हिन्दू भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।


द्वारकाधीश मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय 


इस प्रशिद्ध मंदिर में पूरे वर्ष टूरिस्टो के द्वारा सबसे अधिक देखा जाने वाला पर्यटक स्थल है। इस मंदिर में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य यात्रा करना बहुत ही सुखद रहता हैं। इस मंदिर का मुख्य फेस्टिवल कृष्णा जन्माष्टमी हैं जो सितंबर महीने में मनाया जाता हैं आप इस समय भी इस मंदिर की यात्रा कर सकते हैं ।

कैसे पहुंचें द्वारकाधीश मंदिर


द्वारकाधीश मंदिर तक पहुँचना किसी भी शहर से अधिक आसान है। द्वारका से केवल 1.5 किमी दूर द्वारकाधीश मंदिर स्थित हैं। स्थानीय बस, ऑटो और टैक्सी द्वारा इस मंदिर पर आसानी से पंहुचा जा सकता हैं।


द्वारका मंदिर खुलने का समय क्या हैं ?


गुजरात का द्वारकाधीश कृष्ण मंदिर भक्तो के लिए सुबह 6:00 से  दोपहर 1:00 बजे तक और शाम 5:00 बजे - 9:30 बजे रात तक खुला रहता हैं। 


द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के लिए कितना समय लगता हैं ?


द्वारका मंदिर में हर समय भक्तो की भीड़ देखि जा सकती हैं, मंदिर में दर्शन करने के लिए कम से कम १ घंटा लगता हैं। 

द्वारकाधीश मंदिर का प्रवेश शुल्क कितना हैं 


कोई प्रवेश शुल्क नहीं

द्वारका में देखने के लिए यहां कुछ शीर्ष पर्यटक आकर्षण हैं

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
बेव द्वारका द्वीप
द्वारका बीच
रुक्मणी मंदिर।
गोमती नदी / घाट
सुदामा सेतु / पुल
इस्कॉन मंदिर
स्वामी नारायण मंदिर
गीता मंदिर
गोपी तलाव
भड़केश्वर महादेव मंदिर,


द्वारकाधीश मंदिर के बारे में दिलचस्प तथ्य 


हमारे देश के चरम पश्चिमी तट में, अरब सागर और गोमती नदी के तट पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर के बारे में तथ्यों को स्पष्ट करते हुए।

द्वारकाधीश मंदिर को जगत मंदिर के रूप में भी जाना जाता है,

पूजा के चार पवित्र स्थानों में से एक है। ( पश्चिम में द्वारकाधीश मंदिर, पूर्व में पुरी, दक्षिण में रामेश्वरम, उत्तर में बद्रीनाथ )

द्वारकाधीश मंदिर, मूल मंदिर का निर्माण श्रीकृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने कराया था। 

गुजरात का द्वारकाधीश मंदिर को 'सुल्तान' महमूद बेगड़ा ने पंद्रहवीं शताब्दी में मूल संरचना को नष्ट कर दिया था। 

मंदिर पूर्ण रूप से श्री विष्णु को समर्पित हैं। 

मंदिर के शिखर पर लहराता 52 गज के कपड़े से बना झंडा जो प्रमुख आकर्षण में से एक है।